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Channel: जानकी पुल – A Bridge of World Literature
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पुरानी दिल्ली की रंगत: मीना बाज़ार

दिल्ली में जामा मस्जिद के पास मीना बाज़ार है। एक जमाने में हम मीना बाज़ार में हम पाकिस्तानी गायकों के कैसेट ख़रीदने जाते थे। बाद में सीधी के दौर में पाकिस्तानी क़व्वालों के वीडियोज़। कई बार ऐसी चीजें...

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ऐन कार्सन की कविताएँ विनय कुमार के अनुवाद में

आज पढ़िए ऐन कार्सन की पाँच कविताएँ। इस बीच आप अनेक अलग अलग लोगों द्वारा किए गए अनुवादों को पढ़ चुके हैं। लेकिन यह अनुवाद विशेष इसलिए है क्योंकि इसे किया है विनय कुमार ने, जो अंतरराष्ट्रीय ख्याति...

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पंकज सुबीर की कहानी ‘काली कामनाओं के कोलाज़ में कामिनी’

आज पढ़िए वरिष्ठ लेखक पंकज सुबीर की कहानी ‘काली कामनाओं के कोलाज में कामिनी’। पंकज सुबीर की कहानियों की रेंज बहुत प्रभावित करती है। उनकी कहानियों में करुणा भी होती है, व्यंग्य भी। इस कहानी को पढ़िए जो...

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भाखै अकथ कथा बिरतांत -1: मृणाल पाण्डे

वरिष्ठ लेखिका मृणाल पाण्डे के साहित्य से हम बहुत अच्छे से परिचित हैं। उनके लेखन के रेंज से भी। अब उन्होंने अपने जीवन की कहानी लिखनी शुरू की है। उसकी पहली प्रस्तुत है। अगले सप्ताह इसकी अगली कड़ी का...

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दीपांकर गुप्ता की कविताएँ

आज पढ़िए दीपांकर गुप्ता की कुछ कविताएँ। ऐसी कविताएँ जिनमें व्यक्ति का अंतर्विरोध भी है, विकास से हुआ विस्थापन और ढोंग भी है और इन सबमें एक बात जो निरंतर बनी हुई है वह है भरोसा। अंततः ये कविताएँ तमाम...

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गांधी और चम्पारण की कहानी

कांग्रेस पार्टी से जुड़े शुजा गांधी की किताब आई है ‘मिट्टी याद रखती है’। यह किताब चम्पारण की जीवनी है। पंक्ति प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब का लोकार्पण 1 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहर भवन में हुआ। इसकी रपट...

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गांधी को क्यों नहीं समझा पाकिस्तान: विवेक शुक्ला

जाने-माने पत्रकार और लेखक विवेक शुक्ला की किताब आई है ‘1947- विभाजन के शेष सवाल’। इस किताब में उन्होंने इस बात पर भी विचार किया है कि महात्मा गांधी की भारत में इसलिए हत्या की गई क्योंकि हत्यारा यह...

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‘तलब’: स्मृतियों के भीतर प्रेम की तलाश

अभी हाल में ही सुषमा गुप्ता का उपन्यास आया है ‘तलब’। स्मृतियों के रेशे से बुने गए इस उपन्यास पर यह टिप्पणी पढ़ने लायक़ है। लिखा है यतीश कुमार ने। हिन्द युग्म से प्रकाशित इस उपन्यास की समीक्षा आप भी पढ़...

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अनुवाद में क्या-क्या छूट जाता है: कोरियाई साहित्य के बहाने

आज अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस है। अनुवाद ने साहित्यिक परिदृश्य को बदल कर रख दिया है। अनुवाद के इसी बदले परिदृश्य को लेकर, विशेषकर कोरियाई साहित्य और अनुवाद के परिदृश्य को लेकर यह लेख लिखा है कुमारी...

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प्रचण्ड प्रवीर की कहानी ‘ग्रीन मैंगो मोर’

साहित्य का दायित्व है कि वह हर विचार की पड़ताल समाज और समय के सन्दर्भ में करे। कई बार विरोध अन्धविरोध होता है, कई बार समर्थन अन्धसमर्थन होता है। यह जरूरी नहीं है कि लेखक की बात से सहमत हुआ जाए, पर यह...

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एआई और अकादमिक जगत

एआई और उसके प्रयोगों, अकादमिक जगत पर उसके प्रभावों को लेकर युवा लेखक आकाश ने यह लेख लिखा है। इस लेख से हमें एआई की कार्यविधि समझ आती है और यह भी कि उसके कारण किस हद तक कृत्रिमता का प्रसार हो रहा है।...

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अशोक वाजपेयी के श्रीकान्त वर्मा

बरसों पहले अशोक वाजपेयी जी ने श्रीकान्त वर्मा पर यह संस्मरण लिखा था। श्रीकान्त वर्मा के जीवन, उनकी कविता के कई शेड्स हैं इसमें। अशोक वाजपेयी की रचनावली से साभार आपके लिये प्रस्तुत है- मॉडरेटर...

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 प्रज्ञा गौतम की टिप्पणी ‘एक मुकम्मल कहानी की तलाश’

प्रज्ञा गौतम विज्ञान कथा लिखती हैं। हिन्दी में विज्ञान कथा के प्रति क्या नज़रिया है- उसी को लेकर उन्होंने अपने अनुभव साझा किए हैं। संपादकों के अनुभव, लेखकों के अनुभव। बहुत दिलचस्प है और कारुणिक भी। आप...

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श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान: एक रपट

श्रीकान्त वर्मा शिखर सम्मान आयोजन की रपट पढ़िए। लिखा है युवा लेखक और शोधार्थी मुशर्रफ परवेज़ ने- मॉडरेटर  ================== “चाहता तो बच सकता था मगर कैसे बच सकता था  जो बचेगा कैसे रचेगा…” ये पंक्तियाँ...

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श्रीकान्त वर्मा शिखर सम्मान स्वीकृति वक्तव्य: अशोक वाजपेयी

कल यानी 18 सितंबर की शाम श्रीकान्त वर्मा शिखर सम्मान का आयोजन दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में हुआ, जिसमें हिन्दी के शिखर लेखक अशोक वाजपेयी को सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर अशोक वाजपेयी ने जो...

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सत्तावन साल पुराना शायर

हमारे शायर लेखक और महकमा-ए-पुलिस के अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी सत्तावन साल के हो गये हैं। इस बात का क़बूलनामा लिखा है उन्होंने। बधाई के साथ पढ़िए- मॉडरेटर  =============== हज़रात! आज ख़ाकसार सत्तावन...

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बचपन की ओर खुलता एक दरवाज़ा

लेखिका रेखा झा के उपन्यास ‘बिना मुरदों वाला दीया’ बचपन की स्मृतियों की अल्हड़ कहानी है। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक आशुतोष कुमार ठाकुर ने- मॉडरेटर...

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राष्ट्रीय भाषा: एकरूपता नहीं विविधता में एकता

14 सितंबर को हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं? संविधान सभा में भाषा को लेकर, राष्ट्रीय भाषा के सवाल पर क्या बहस हुई? किस कारण से हिन्दी राष्ट्रीय भाषा नहीं बन पाई? इन मुद्दों को लेकर आज इंडियन एक्सप्रेस में...

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हिन्दी दिवस और जेन ज़ी

हिन्दी दिवस के अवसर पर पढ़िए जेन ज़ी और हिन्दी दिवस के बारे में। लिखा है युवा शोधार्थी और लेखक मुशर्रफ परवेज़ ने- मॉडरेटर  =================   लगा रहे प्रेम हिन्दी में, पढूँ हिन्दी लिखूँ हिन्दी, चलन...

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स्कर्ट के युग मेँ साड़ी लिपटाने का प्रयास

आज हिन्दी दिवस है। आज हम दो लेख पढ़ेंगे। पहला लेख है भाषा प्रयोगों की अराजकता पर, दूसरा लेख जेन जी की हिन्दी पर है। पहले लेख में लेखक प्रचण्ड प्रवीर ने भाषा प्रयोगों को लेकर विस्तार से लिखा है। आइये...

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